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लार्ड ऑफ लव पुस्तक – कहानी, कविता, गीत, गज़ल, दोहे, शायरी और एहसास

लार्ड ऑफ लव पुस्तक – कहानी, कविता, गीत, गज़ल, दोहे, शायरी और एहसास

लार्ड ऑफ लव पुस्तक : लेखक की कलम से ..

जीवन जीने का व्यवहारिक रास्ता छोड़कर, मैंने साल 2011 में अपना सफ़र आरंभ किया। अभिनेता बनने की चाह मुझे खींचकर मुंबई ले गयी। जहाँ बरसों दर दर ठोकरें खाने के बाद भी मेरी मेहनत की भूमि पर सफलता की एक बूँद तक न गिरी। नाम बनाने से पहले शादी करने की इच्छा नहीं थी, पर वक़्त अपनी धुन में चलता है, उसके आगे कब किसकी चली है। संघर्ष के मध्य में ही मैं संसार के सबसे पवित्र बंधन में बँध गया।

संघर्ष जारी रहा…

हर दिन किसी चमत्कार की उम्मीद में मैंने सपनों का दामन कभी नहीं छोड़ा। पर उम्मीद और हकीकत में फर्क होता है। उम्मीद वो तस्वीर दिखाती है, जो चित्रकार ने बनाई ही नहीं। मेरी उम्मीद की काल्पनिक तस्वीर और हकीकत की तस्वीर में ज़मीन आसमान का फर्क था। बरसों पहले जो मैं बनने चला था, उससे मैं कोसों दूर था और जो मैं था, वो मैं बनना नहीं चाहता था। वक़्त अपनी धुन में चलता रहा और संघर्ष के कई साल बाद भी मैं अपनी धुन में एकतरफा चलता रहा।

मुंबई से रोते हुए पटना वापिस

आखिरकार वक़्त जीत ही गया और मैं हार ही गया। हकीकत से कब तक भागता। मैंने भी हार मान ली और मुंबई से रोते हुए पटना वापिस आ गया। 20 साल की उम्र का मेधावी छात्र, 28 की उम्र में नाकामयाब हो चुका था। वक़्त के शतरंज में, मैं उस मोहरे की तरह फँस गया जिसके पास चलने को एक घर भी नहीं होता।

इसी दौरान मेरे बचपन के मित्र ध्रुव शेखर जी ने सिविल सर्विसेज की तैयारी की सलाह दी। न चाहते हुए भी मैंने उनकी बात मान ली और सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए दिल्ली का रुख किया। तैयारी तो सिविल सर्विसेज की शुरू हुई पर नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। यूपीएससी की तैयारी के लिए उठी कलम ने बागी रूप अख्तियार कर लिया। कलम ने यूपीएससी के रास्ते को छोड़ दिया और अपनी धुन में उल्टी दिशा में जाने लगी। मेरी कलम से कहानियाँ बहने लगी, गीत, गज़ल, शायरी बहने लगे… दोहे, कविताओं की बाढ़ सी आ गई।

एकतरफा रास्ता लिया, आँखें बंद की और लगा दी छलाँग स्याही के समंदर में

यूपीएससी की तैयारी छोड़कर फिर से कला की दुनिया में छलाँग लगाना, बिना किसी नाव और पतवार के समंदर में छलाँग लगाने जैसा था। पर हारने को था ही क्या। मैंने फिर से एकतरफा रास्ता लिया, आँखें बंद की और लगा दी छलाँग स्याही के समंदर में। उसी छलाँग का नतीज़ा इस वक़्त आपके हाथ में है।

इस वक़्त जो किताब आपके हाथ में है वो कहने को तीन साल में लिखी गई है। ये तीन साल तो कहने की बात है, सच कहूँ तो ये ग्यारह साल की कठोर तपस्या का परिणाम है। कहानी, कविता, गीत, गज़ल, दोहे, शायरी और एहसास की गहराई से लैस ये पुस्तक लेखनी की एक नई धारा का आगाज़ है।

लार्ड ऑफ लव

ये “लार्ड ऑफ लव” श्रृंखला की पहली पुस्तक है। आगे इस श्रृंखला में पाँच, सात, दस कितनी किताबें आएंगी, इसका अंदाज़ा लगाना मेरे लिए भी ज़रा मुश्किल है। आप दिल थामकर पढ़ें और एहसास के सबसे गहरे समंदर में जाने को तैयार हो जाएं।

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